वोल्टेज, करंट और ओम का नियम,

वोल्टेज, करंट और ओम का नियम,
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आज के युग में हम अगर इलेक्ट्रिसिटी अर्थात विद्युत को जादुई दुनिया कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा। आज हम एक बटन दबाते हैं और घर प्रकाशित हो जाता है पंखे से हवा बहने लगती है रसोई मैं लगे उपकरण काम करने लगते हैं। विद्युत के माध्यम से आज हम ऐसी ऐसी चमत्कारी चीजें कर सकते हैं जो पहले के युग मैं हम सोच भी नहीं सकते थे। आज किसी के जीने से लेकर मरने तक विद्युत का एक अपना अलग ही प्रभाव है। किसी भी इलेक्ट्रिक सर्किट को समझने के लिए हमें वोल्टेज, करंट और ओम के नियम को जानना अत्यंत ही जरूरी है।

वोल्टेज अर्थात विभवांतर

हम जानते हैं इस ब्रह्मांड के किसी भी बिंदु पर अपना एक ऊर्जा का लेबल है। इसे हम उस बिंदु का विभव अर्थात वोल्टेज कहते हैं। दो बिंदुओं के बीच ऊर्जा के अंतर को हम विभवांतर के रूप में नापते हैं। यहीं से इसकी परिभाषा उत्पन्न होती है। किसी भी इकाई आवेश स्कोर एक बिंदु से दूसरे बिंदु पर ले जाने के लिए किया गया कार्य ही विभांतर अर्थात वोल्टेज डिफरेंस कहलाता है। इसे हम मुख्यतः विद्युतीय परिपथ मैं उपयोग करते हैं। दो बिंदुओं के बीच के विभवांतर के रूप में।

विद्युत धारा अर्थात करंट

सभी पदार्थ परमाणु से बने हुए हैं और परमाणु के मुक्ता 3 भाग होते हैं , प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन । जिसमें से इलेक्ट्रॉन पर इकाई ऋण आत्मक आवेश, प्रोटॉन पर धनात्मक आवेश की न्यूट्रॉन पर कोई आवेश नहीं होता । जब भी हम किसी सुचालक अर्थात कंडक्टर पर विभवांतर लगाते हैं तो उसमें से इलेक्ट्रान दूसरी तरफ में जाते हैं। इलेक्ट्रान पर ऋण आत्मक आवेश होने के कारण धारा की दिशा के विपरीत मानी जाती है। अतः करंट की परिभाषा इस प्रकार है। इकाई समय में विभवांतर के कारण चालक में बहने वाले आवेशों को धारा कहते हैं।

ओम का नियम

किसी भी विद्युत परिपथ के किन्ही दो बिंदुओं के बीच प्रवाहित होने वाली धारा दोनों बिंदुओं के विभवांतर तथा प्रतिरोध के अनुपातिक होती है। जबकि सर्किट में भौतिक अवस्था में कोई चेंज नहीं होना चाहिए।

वोल्टेज, करंट और ओम का नियम
की अधिक जानकारी के लिए आप दिए गए वीडियो को देख सकते हैं.

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Gyanee baba

23 thoughts on “वोल्टेज, करंट और ओम का नियम,

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